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जनपद के महान लोग

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श्रीमती सिरियज्जी – चित्रदुर्ग की लोक संस्कृति का चलता-फिरता विश्वकोशमहान विभूतियाँ

श्रीमती सिरियज्जी – चित्रदुर्ग की लोक संस्कृति का चलता-फिरता विश्वकोश

कर्नाटक के लोक साहित्य में श्रीमती सिरियज्जी का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। औपचारिक शिक्षा और अक्षरज्ञान से वंचित होने के बावजूद उन्होंने हजारों लोकगीतों, लोकपदों और कथाओं को अपनी असाधारण स्मरणशक्ति में सुरक्षित रखा। इसी कारण वे “जनपद सिरी”, “जनपद कोकिला”, “जनपद कणज” और लोक संस्कृति के चलते-फिरते विश्वकोश के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20264 बार देखा गया