कर्नाटक के लोक साहित्य में श्रीमती सिरियज्जी का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। औपचारिक शिक्षा और अक्षरज्ञान से वंचित होने के बावजूद उन्होंने हजारों लोकगीतों, लोकपदों और कथाओं को अपनी असाधारण स्मरणशक्ति में सुरक्षित रखा।
इसी कारण वे “जनपद सिरी”, “जनपद कोकिला”, “जनपद कणज” और लोक संस्कृति के चलते-फिरते विश्वकोश के रूप में प्रसिद्ध हुईं।