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महान विभूतियाँ

इस खंड में चित्रदुर्ग के राजाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, लेखकों, कलाकारों, संतों, विद्वानों, समाज सुधारकों और अन्य विशिष्ट हस्तियों को शामिल किया गया है।

15 लेख

श्री मुरिगे शांतवीर स्वामी – चित्रदुर्ग में मुरुघा परंपरा को स्थायी आधार देने वाले महान संत

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श्री मुरिगे शांतवीर स्वामी – चित्रदुर्ग में मुरुघा परंपरा को स्थायी आधार देने वाले महान संत

चित्रदुर्ग की इसी विरासत में श्री जगद्गुरु मुरुघराजेंद्र बृहन्मठ, जिसे सामान्यतः मुरुघा मठ कहा जाता है, का विशेष स्थान है। चित्रदुर्ग में इस महान परंपरा को स्थायी आधार प्रदान करने वाले संत थे श्री मुरिगे शांतवीर देशिक, जिन्हें मुरिगे शांतवीर स्वामी अथवा मुरुघा शांतवीरेश्वर स्वामी के नाम से भी जाना जाता है।

राघवेंद्र पद्मशाली21 अक्टूबर 20260 बार देखा गया
बेलगेरे चंद्रशेखर शास्त्री – वह कवि जिसकी कविता कागज़ पर नहीं, लोगों की स्मृतियों में लिखी गई

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बेलगेरे चंद्रशेखर शास्त्री – वह कवि जिसकी कविता कागज़ पर नहीं, लोगों की स्मृतियों में लिखी गई

ऐसे ही दुर्लभ व्यक्तित्वों में बेलगेरे चंद्रशेखर शास्त्री का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे आशुकवि, विद्वान, चिंतक, लोकसंस्कृति प्रेमी और अवधूत-स्वभाव के असाधारण व्यक्ति थे। प्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षक और समाजसेवी बेलगेरे कृष्ण शास्त्री के पिता के रूप में भी उनका परिचय मिलता है, लेकिन चंद्रशेखर शास्त्री का स्वयं का व्यक्तित्व इतना विशिष्ट था कि वे स्वतंत्र रूप से चित्रदुर्ग की सांस्कृतिक विरासत में स्थान पाने योग्य हैं।

राघवेंद्र पद्मशाली21 अक्टूबर 20262 बार देखा गया
काशी अप्पन्ना शेट्टी – चित्रदुर्ग की अन्नदान, दासोह और सेवा परंपरा के स्मरणीय व्यक्तित्व

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काशी अप्पन्ना शेट्टी – चित्रदुर्ग की अन्नदान, दासोह और सेवा परंपरा के स्मरणीय व्यक्तित्व

चित्रदुर्ग का इतिहास केवल उसके विशाल किले, पत्थर की दीवारों, नायक शासकों और युद्धों की कहानी नहीं है। इस भूमि के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को आकार देने में दानियों, व्यापारियों, समाजसेवियों और परोपकारी व्यक्तियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे ही स्मरणीय व्यक्तित्वों में चित्रदुर्ग के काशी अप्पन्ना शेट्टी का नाम उल्लेखनीय है।

राघवेंद्र पद्मशाली21 अक्टूबर 20263 बार देखा गया
मदकरी नायक – चित्रदुर्ग के अंतिम महान नायक

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मदकरी नायक – चित्रदुर्ग के अंतिम महान नायक

मदकरी नायक कर्नाटक के इतिहास में साहस, स्वाभिमान, संघर्ष और वीरता के प्रतीक के रूप में याद किए जाते हैं। वे चित्रदुर्ग के नायक राजवंश के अंतिम प्रमुख शासक थे और अपने राज्य की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष के कारण इतिहास में विशिष्ट स्थान रखते हैं। चित्रदुर्ग का विशाल पाषाण दुर्ग, उसकी पहाड़ियाँ, विशाल द्वार, प्राचीर और रक्षात्मक संरचनाएँ मदकरी नायक के इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

राघवेंद्र पद्मशाली21 अक्टूबर 20260 बार देखा गया
श्रीमती सिरियज्जी – चित्रदुर्ग की लोक संस्कृति का चलता-फिरता विश्वकोश

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श्रीमती सिरियज्जी – चित्रदुर्ग की लोक संस्कृति का चलता-फिरता विश्वकोश

कर्नाटक के लोक साहित्य में श्रीमती सिरियज्जी का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। औपचारिक शिक्षा और अक्षरज्ञान से वंचित होने के बावजूद उन्होंने हजारों लोकगीतों, लोकपदों और कथाओं को अपनी असाधारण स्मरणशक्ति में सुरक्षित रखा। इसी कारण वे “जनपद सिरी”, “जनपद कोकिला”, “जनपद कणज” और लोक संस्कृति के चलते-फिरते विश्वकोश के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20264 बार देखा गया
श्री पहलवान नंजप्पा – चित्रदुर्ग के कुश्ती जगत का ध्रुवतारा

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श्री पहलवान नंजप्पा – चित्रदुर्ग के कुश्ती जगत का ध्रुवतारा

इसी गौरवशाली परंपरा से निकले महान पहलवानों में पहलवान नंजप्पा का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल एक शक्तिशाली पहलवान ही नहीं थे, बल्कि कुश्ती गुरु, देशभक्त, स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले साहसी व्यक्ति, तबला प्रेमी और कला-संस्कृति से जुड़े बहुमुखी व्यक्तित्व भी थे।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20262 बार देखा गया
श्री मल्लाडिहल्ली राघवेंद्र स्वामी (तिरुका) - योग, आयुर्वेद, शिक्षा और मानव सेवा के महान साधक

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श्री मल्लाडिहल्ली राघवेंद्र स्वामी (तिरुका) - योग, आयुर्वेद, शिक्षा और मानव सेवा के महान साधक

कर्नाटक की योग, आयुर्वेद, शिक्षा और समाजसेवा की परंपरा में श्री मल्लाडिहल्ली राघवेंद्र स्वामी, जिन्हें प्रेमपूर्वक “तिरुका” कहा जाता था, का विशिष्ट स्थान है। योगगुरु, आयुर्वेद के ज्ञाता, समाजसेवी, शिक्षाप्रेमी और लेखक के रूप में उन्होंने अपना लंबा जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित किया।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20262 बार देखा गया
श्री सी. जी. कृष्णस्वामी (CGK) – जन रंगमंच की सशक्त आवाज़

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श्री सी. जी. कृष्णस्वामी (CGK) – जन रंगमंच की सशक्त आवाज़

श्री सी. जी. कृष्णस्वामी, जिन्हें ‘सीजीके’ के नाम से जाना जाता है, कर्नाटक के आधुनिक रंगमंच आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक थे। निर्देशक, आयोजक, सामाजिक कार्यकर्ता और अनेक कलाकारों के मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने कन्नड़ रंगमंच पर गहरी छाप छोड़ी।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20261 बार देखा गया
श्री बिच्चुगत्ति भरमन्ना नायक - चित्रदुर्ग के “समर मार्तंड”

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श्री बिच्चुगत्ति भरमन्ना नायक - चित्रदुर्ग के “समर मार्तंड”

चित्रदुर्ग के नायक शासकों में बिच्चुगत्ति भरमन्ना नायक का नाम अत्यंत गौरव के साथ लिया जाता है। वे केवल युद्धभूमि के वीर नहीं थे, बल्कि कुशल प्रशासक, दुर्ग निर्माता, जल-संसाधनों के विकासकर्ता और प्रजा की सुरक्षा को महत्व देने वाले शासक भी थे।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20262 बार देखा गया
श्री टी. एस. वेंकन्नैया - आधुनिक कन्नड़ साहित्य के विकास के महान विद्वान और गुरु

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श्री टी. एस. वेंकन्नैया - आधुनिक कन्नड़ साहित्य के विकास के महान विद्वान और गुरु

तलुकु सुब्बन्ना वेंकन्नैया (टी. एस. वेंकन्नैया) बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में आधुनिक कन्नड़ साहित्य के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान विद्वानों में से एक थे।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20261 बार देखा गया
श्री हुल्लूरु श्रीनिवास जोइस - इतिहासकार, शोधकर्ता, राष्ट्रप्रेमी और समर्पित कार्यकर्ता

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श्री हुल्लूरु श्रीनिवास जोइस - इतिहासकार, शोधकर्ता, राष्ट्रप्रेमी और समर्पित कार्यकर्ता

चित्रदुर्ग की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने वाले महान विद्वानों में श्री हुल्लूरु श्रीनिवास जोइस का विशिष्ट स्थान है। वे इतिहासकार, शोधकर्ता, अधिवक्ता, लेखक, पत्रकार और राष्ट्रप्रेमी थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और कर्नाटक एकीकरण आंदोलन में भी सक्रिय भाग लिया।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20261 बार देखा गया
श्री बेलगेरे कृष्णशास्त्री - शिक्षा, साहित्य, संस्कृति को समर्पित जीवन

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श्री बेलगेरे कृष्णशास्त्री - शिक्षा, साहित्य, संस्कृति को समर्पित जीवन

कर्नाटक की शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों में श्री बेलगेरे कृष्णशास्त्री का महत्वपूर्ण स्थान है।

राघवेंद्र पद्मशाली20 अक्टूबर 20264 बार देखा गया