चित्रदुर्ग की इसी विरासत में श्री जगद्गुरु मुरुघराजेंद्र बृहन्मठ, जिसे सामान्यतः मुरुघा मठ कहा जाता है, का विशेष स्थान है।
चित्रदुर्ग में इस महान परंपरा को स्थायी आधार प्रदान करने वाले संत थे श्री मुरिगे शांतवीर देशिक, जिन्हें मुरिगे शांतवीर स्वामी अथवा मुरुघा शांतवीरेश्वर स्वामी के नाम से भी जाना जाता है।