ऐसे ही दुर्लभ व्यक्तित्वों में बेलगेरे चंद्रशेखर शास्त्री का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
वे आशुकवि, विद्वान, चिंतक, लोकसंस्कृति प्रेमी और अवधूत-स्वभाव के असाधारण व्यक्ति थे।
प्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षक और समाजसेवी बेलगेरे कृष्ण शास्त्री के पिता के रूप में भी उनका परिचय मिलता है, लेकिन चंद्रशेखर शास्त्री का स्वयं का व्यक्तित्व इतना विशिष्ट था कि वे स्वतंत्र रूप से चित्रदुर्ग की सांस्कृतिक विरासत में स्थान पाने योग्य हैं।