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श्री सी. जी. कृष्णस्वामी (CGK) – जन रंगमंच की सशक्त आवाज़

श्री सी. जी. कृष्णस्वामी, जिन्हें ‘सीजीके’ के नाम से जाना जाता है, कर्नाटक के आधुनिक रंगमंच आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक थे। निर्देशक, आयोजक, सामाजिक कार्यकर्ता और अनेक कलाकारों के मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने कन्नड़ रंगमंच पर गहरी छाप छोड़ी।

लेखक राघवेंद्र पद्मशालीप्रकाशित 20 अक्टूबर 20263 मिनट का पाठ1 बार देखा गया
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श्री सी. जी. कृष्णस्वामी (CGK) – जन रंगमंच की सशक्त आवाज़

श्री सी. जी. कृष्णस्वामी, जिन्हें ‘सीजीके’ के नाम से जाना जाता है, कर्नाटक के आधुनिक रंगमंच आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक थे। निर्देशक, आयोजक, सामाजिक कार्यकर्ता और अनेक कलाकारों के मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने कन्नड़ रंगमंच पर गहरी छाप छोड़ी।

उनका मानना था कि रंगमंच केवल सभागारों और पारंपरिक मंचों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहाँ लोग हैं, वहीं रंगमंच हो सकता है। सड़क, चौक और खुला मैदान भी विचार और कला के मंच बन सकते हैं।

कन्नड़ रंगमंच में नई लहर

कन्नड़ रंगमंच की आधुनिक यात्रा में बी. वी. कारंत जैसे महान रंगकर्मियों ने संगीत और अभिनव नाट्य प्रयोगों के माध्यम से नई संभावनाएँ पैदा कीं। गिरीश कार्नाड जैसे लेखकों और नाटककारों ने इसकी साहित्यिक और वैचारिक शक्ति को और विस्तार दिया।

इसी यात्रा में 1990 के दशक में सीजीके ने नुक्कड़ और सड़क नाटकों के माध्यम से एक नई लहर पैदा की।

उन्होंने साबित किया कि प्रभावशाली नाटक के लिए विशाल मंच और महँगी सजावट अनिवार्य नहीं हैं। कलाकारों की प्रतिबद्धता, एक महत्वपूर्ण विचार और जनता से सीधा संवाद ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हो सकते हैं।

सामाजिक चेतना का रंगमंच

सीजीके की रंगयात्रा सामाजिक आंदोलनों से गहराई से जुड़ी हुई थी। दलितों और समाज के हाशिए पर खड़े समुदायों से जुड़े प्रश्नों को उन्होंने रंगमंच पर महत्वपूर्ण स्थान दिया।

जिन विषयों और विचारों को अक्सर मुख्यधारा में पर्याप्त जगह नहीं मिलती थी, उन्हें उन्होंने लोगों के सामने लाने का प्रयास किया।

उनके लिए रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं था। वह समाज से सवाल करने, संवाद पैदा करने और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करने का माध्यम था।

उनके कार्य का प्रभाव कर्नाटक से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा।

‘ओडलाला’ – एक यादगार प्रस्तुति

सीजीके से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रस्तुतियों में ‘ओडलाला’ का विशेष स्थान है।

अपनी सामाजिक संवेदना और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण इस नाटक ने व्यापक पहचान बनाई। दिल्ली में इसके लगभग सौ प्रदर्शन हुए। प्रसिद्ध अभिनेत्री उमाश्री के प्रभावशाली अभिनय ने इस प्रस्तुति को और भी यादगार बनाया।

सैकड़ों कलाकारों के मार्गदर्शक

सीजीके की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी नई प्रतिभाओं को रंगमंच से जोड़ना।

उन्होंने अनेक कलाकारों को प्रोत्साहित किया, प्रशिक्षित किया और उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर दिया। इस प्रकार उनकी विरासत केवल उनके द्वारा निर्देशित नाटकों में नहीं, बल्कि उनसे प्रेरित कलाकारों की पीढ़ियों में भी जीवित है।

उनका विश्वास था कि रंगमंच छात्रों और युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, सामूहिकता, अभिव्यक्ति और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित कर सकता है।

सड़क बनी रंगमंच

सीजीके का नाम विशेष रूप से स्ट्रीट थिएटर यानी सड़क रंगमंच से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने रंगमंच को दर्शकों तक पहुँचाया। कलाकार और दर्शक के बीच की दूरी कम की और सामाजिक मुद्दों पर सीधे संवाद का वातावरण तैयार किया।

उनके लिए सड़क केवल आवागमन की जगह नहीं थी; वह विचारों, प्रश्नों और सामाजिक चेतना का जीवंत मंच बन सकती थी।

स्मृतियों में जीवित CGK

आज भी सीजीके की स्मृति में आयोजित रंगोत्सव, पुरस्कार और सड़क रंगमंच से जुड़े कार्यक्रम उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हैं।

CGK राष्ट्रीय रंगोत्सव के लिए उनकी एक विशेष प्रतिमा भी तैयार की गई। कलाकार एम. रवि, अप्पय्या और श्रीधर अडप्पा ने इस प्रतिमा के निर्माण में एक महीने से अधिक समय लगाया।

प्रतिमा में सीजीके को उसी परिचित मुद्रा में दर्शाया गया, जिसमें वे ‘सम्सा’ ओपन-एयर थिएटर में बैठा करते थे। इस कारण यह प्रतिमा केवल उनका बाहरी स्वरूप नहीं, बल्कि रंगकर्मियों की स्मृतियों में बसे सीजीके को भी अभिव्यक्त करती है।

एक जीवंत विरासत

सीजीके की विरासत उनके नाटकों की संख्या से कहीं बड़ी है। उन्होंने रंगमंच को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा, उपेक्षित आवाज़ों को अभिव्यक्ति दी और अनेक युवाओं को कला की दुनिया में प्रवेश करने की प्रेरणा दी।

आज भी जब कोई युवा कलाकार खुले मैदान या सड़क पर सामाजिक प्रश्नों को नाटक के माध्यम से उठाता है, तब सीजीके की रंगदृष्टि फिर जीवंत हो उठती है।

सीजीके ने केवल रंगमंच को सड़क तक नहीं पहुँचाया; उन्होंने सड़क को ही रंगमंच और जनता को उसका सहभागी बना दिया।

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लेखक के बारे में

राघवेंद्र पद्मशाली · प्रशासक / मुख्य संपादक

चितारदुर्गा के संस्थापक, एडमिन और मुख्य संपादक संपर्क: +91 77979 73031, +91 97432 08738 वेबसाइट: www.raghavendrapadmashali.com

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