ब्रिटिश काल चित्रदुर्ग जिले की शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण दौर था। उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में शिक्षा धीरे-धीरे पारंपरिक ग्राम-आधारित पद्धति से आगे बढ़कर प्राथमिक विद्यालयों, सरकार समर्थित शिक्षण संस्थानों, परीक्षा प्रणाली और औपचारिक पाठ्यक्रम पर आधारित अधिक संगठित व्यवस्था की ओर बढ़ी।
ब्रिटिश काल चित्रदुर्ग में परिवहन और संचार व्यवस्था के विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। आधुनिक सड़कों और मोटर वाहनों के आम होने से पहले लोग यात्रा और माल ढुलाई के लिए मुख्य रूप से बैलगाड़ियों, घोड़ागाड़ियों, भार ढोने वाले पशुओं और पैदल यात्रा पर निर्भर थे।
ब्रिटिश काल ने चित्रदुर्ग की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। अठारहवीं शताब्दी में चित्रदुर्ग के नायक शासकों का शासन समाप्त होने के बाद यह क्षेत्र हैदर अली और टीपू सुल्तान के अधीन मैसूर राज्य का हिस्सा बना। 1799 के चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद मैसूर की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव आए।